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ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कड़ा करते हुए तीन विदेशी जहाजों को वापस लौटा दिया है। IRGC ने स्पष्ट किया है कि यह रणनीतिक मार्ग अब उन देशों के लिए प्रतिबंधित रहेगा जो अमेरिका और इजरायल का समर्थन कर रहे हैं। इस कदम ने राष्ट्रपति ट्रंप के उन दावों को भी चुनौती दी है जिसमें उन्होंने ईरान द्वारा टैंकरों को रास्ता देने की बात कही थी।
ईरानी गार्ड्स ने इस सैन्य कार्रवाई को अपनी संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का हिस्सा बताया है। रोके गए तीनों जहाज अलग-अलग देशों के कंटेनर पोत थे जिन्हें चेतावनी देने के बाद आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। ईरान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अपने विरोधियों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल, से जुड़े किसी भी समुद्री आवागमन को अब बर्दाश्त नहीं करेगा। यह कदम उस समय उठाया गया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर संकेत दिया था कि ईरान बातचीत के लिए नरम पड़ रहा है और उसने कुछ तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है। हालांकि, ईरान के ताजा बयान और जहाजों को रोकने की कार्रवाई ट्रंप के दावों के ठीक उलट है। दोनों देशों के बीच सूचनाओं के इस विरोधाभास से किसी भी संभावित शांति समझौते की राह और अधिक कठिन हो गई है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति अभी भी काफी अस्थिर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने या वहां तनाव बढ़ने का सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। फरवरी के अंत से शुरू हुए संघर्ष के बाद से कई बड़े शिपिंग ऑपरेटरों ने पहले ही इस रास्ते से दूरी बनाना शुरू कर दिया है, जिससे माल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी जारी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के स्तर को छू सकती हैं, जो वैश्विक स्तर पर गंभीर आर्थिक मंदी का कारण बन सकता है।
ईरान ने इस संघर्ष को केवल समुद्र तक सीमित नहीं रखा है और क्षेत्र में मौजूद आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर उन इलाकों से दूर रहने को कहा गया है जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में हमलों की आशंका को लेकर चिंता जताई है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। यह चेतावनी संकेत देती है कि ईरान आने वाले दिनों में जमीन पर मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर और अधिक आक्रामक ड्रोन या मिसाइल हमले कर सकता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगामी चीन दौरे से पहले चीन ने ईरान विवाद पर अपने कूटनीतिक रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। बीजिंग अब तनाव कम करने और ईरान को बातचीत के लिए राजी करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि उच्च-स्तरीय अमेरिकी-चीन शिखर सम्मेलन के लिए स्थिर वातावरण तैयार किया जा सके।
अमेरिकी सरकार के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, चीन अब केवल ईरान का मूक समर्थक नहीं रह गया है बल्कि वह शांतिदूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। बीजिंग ने संकेत दिया है कि वह ईरानियों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए सक्रिय है और इस बदलाव को छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन चाहता है कि राष्ट्रपति ट्रंप की मेजबानी करने से पहले खाड़ी की स्थिति स्थिर हो जाए जिससे द्विपक्षीय आर्थिक और सुरक्षा वार्ताओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। खाड़ी में जारी युद्ध और हालिया हमलों के कारण राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे की तारीखों में बदलाव हो सकता है और अब इसके मई 2026 में होने की चर्चा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी कॉरिडोर है जो दुनिया भर में तेल और गैस शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। यहाँ किसी भी तरह की रुकावट का मतलब वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल है। एक बड़ी ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन के लिए भी यह जरूरी है कि खाड़ी में पूर्ण रूप से शांति बहाल हो। एशिया का हर देश इस प्रस्तावित समिट पर करीब से नजर रख रहा है क्योंकि इससे इलाके की स्थिरता और आर्थिक हालात पर गहरा असर पड़ सकता है।
कूटनीतिक बातचीत के बीच कुछ गंभीर मुद्दे अब भी बने हुए हैं जिन पर अमेरिकी वार्ताकार कड़ी नजर रख रहे हैं। इसमें चीन द्वारा ईरानी तेल की खरीद और ईरान को संभावित सैन्य समर्थन जैसे विषय शामिल हैं। युद्ध से पहले चीन द्वारा ईरान को एंटी-शिप मिसाइल बेचने की चर्चाओं ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी थी। इन मुश्किलों के बावजूद दोनों पक्ष बातचीत बनाए हुए दिख रहे हैं क्योंकि यह दोनों के ही हित में है। यदि चीन ईरान को बातचीत के लिए राजी कर लेता है, तो यह मौजूदा वैश्विक संकट के बीच एक बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि युद्धविराम पर चल रही बातचीत के बीच ईरान ने अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 10 तेल टैंकर गुजरने की अनुमति दी है.
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