Fact Check: रूस की तेल रिफाइनरी पर हमले का वायरल सीसीटीवी वीडियो निकला फेक; AI टूल्स की मदद से बनाया गया भ्रम

यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के दावे के साथ वायरल हो रहा वीडियो असली नहीं है। तकनीकी जांच और फॉरेंसिक एनालिसिस में पुष्टि हुई है कि यह वीडियो एआई (Artificial Intelligence) की मदद से तैयार किया गया है।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Mar 27, 2026 • 8:42 PM | New Delhi
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Fact Check: रूस की तेल रिफाइनरी पर हमले का वायरल सीसीटीवी वीडियो निकला फेक; AI टूल्स की मदद से बनाया गया भ्रम
यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के दावे के साथ वायरल हो रहा वीडियो असली नहीं है। तकनीकी जांच और फॉरेंसिक एनालिसिस में पुष्टि हुई है कि यह वीडियो एआई (Artificial Intelligence) की मदद से तैयार किया गया है।
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Fact Check: रूस की तेल रिफाइनरी पर हमले का वायरल सीसीटीवी वीडियो निकला फेक; AI टूल्स की मदद से बनाया गया भ्रम
Fact Check: रूस की तेल रिफाइनरी पर हमले का वायरल सीसीटीवी वीडियो निकला फेक; AI टूल्स की मदद से बनाया गया भ्रम

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"इंस्टाग्राम यूजर ‘poltical_apocalypse’ ने 24 मार्च 2026 को वीडियो को पोस्ट (आर्काइव लिंक) करते हुए लिखा, “यूक्रेन का फिर हमला: शाम के हमलों में रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। CCTV फुटेज में रूसी सीमा के काफी अंदर स्थित दो तेल रिफाइनरियों में जोरदार धमाके कैद हुए हैं।"

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Claim: False

“यूक्रेन का फिर हमला: शाम के हमलों में रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। CCTV फुटेज में रूसी सीमा के काफी अंदर स्थित दो तेल रिफाइनरियों में जोरदार धमाके कैद हुए हैं। यूक्रेन की सेना ने शाम के समय तालमेल के साथ हमले किए, जिनमें अहम ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाया गया। इन रणनीतिक हमलों का मकसद रूस के ईंधन उत्पादन और सैन्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करना है। यह कार्रवाई रूस की युद्ध क्षमताओं को कमजोर करने में यूक्रेन की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है।“

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Claim By रूस और यूक्रेन का युद्ध चार साल से चल रहा है। यूक्रेन ने रूस की तेल रिफायनरियों को भी निशाना बनाया है। हालांकि, इस दावे से वायरल हो रहा वीडियो एआई निर्मित है।
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"इंस्टाग्राम यूजर ‘poltical_apocalypse’ ने 24 मार्च 2026 को वीडियो को पोस्ट (आर्काइव लिंक) करते हुए लिखा, “यूक्रेन का फिर हमला: शाम के हमलों में रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। CCTV फुटेज में रूसी सीमा के काफी अंदर स्थित दो तेल रिफाइनरियों में जोरदार धमाके कैद हुए हैं।"

Claim Summary:
“यूक्रेन का फिर हमला: शाम के हमलों में रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। CCTV फुटेज में रूसी सीमा के काफी अंदर स्थित दो तेल रिफाइनरियों में जोरदार धमाके कैद हुए हैं। यूक्रेन की सेना ने शाम के समय तालमेल के साथ हमले किए, जिनमें अहम ऊर्जा ढांचों को निशाना बनाया गया। इन रणनीतिक हमलों का मकसद रूस के ईंधन उत्पादन और सैन्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करना है। यह कार्रवाई रूस की युद्ध क्षमताओं को कमजोर करने में यूक्रेन की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है।“

यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के दावे के साथ वायरल हो रहा वीडियो असली नहीं है। तकनीकी जांच और फॉरेंसिक एनालिसिस में पुष्टि हुई है कि यह वीडियो एआई (Artificial Intelligence) की मदद से तैयार किया गया है।

वायरल दावा और कूटनीतिक संदर्भ

24 मार्च 2026 को इंस्टाग्राम पर 'poltical_apocalypse' नामक यूजर ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें चार अलग-अलग सीसीटीवी क्लिप्स का कोलाज है। इसमें रिफाइनरियों में भीषण आग और धमाके दिखाई दे रहे हैं। दावा किया गया कि यह यूक्रेन द्वारा रूसी सीमा के काफी अंदर किए गए रणनीतिक हमलों के वास्तविक फुटेज हैं, जिनका मकसद रूस की सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना है। हालांकि, यूक्रेन ने वास्तव में 22 मार्च 2026 को फिनलैंड की सीमा के पास स्थित रूस के प्रिमोर्स्क तेल टर्मिनल और ऊफा शहर की रिफाइनरी पर ड्रोन हमले किए हैं, लेकिन वायरल हो रहा यह विशिष्ट वीडियो उन घटनाओं का नहीं है।

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पड़ताल में सामने आई तकनीकी कमियां

वीडियो की सूक्ष्म जांच करने पर इसमें कई ऐसी विसंगतियां पाई गईं जो केवल एआई-जनित सामग्री में ही संभव हैं। वीडियो की टाइमस्टैम्प्स पूरी तरह से अतार्किक हैं, जहाँ समय आगे बढ़ने के बजाय अचानक पीछे चला जाता है। इसके अलावा, धमाके के समय भागते हुए कर्मचारियों के शरीर की बनावट और उनकी हरकतें अवास्तविक नजर आ रही हैं। 'डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट' (DAU) के अनुसार, 0:06 से 0:08 सेकंड के बीच रिफाइनरी के पाइपों का आकार रहस्यमयी तरीके से बदल रहा है और वे धुंधले या बिगड़े हुए दिख रहे हैं।

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तकनीकी जांच और एआई डिटेक्शन के नतीजे

वीडियो की सत्यता जांचने के लिए 'हाइव मॉडरेशन' (Hive Moderation) जैसे अत्याधुनिक एआई डिटेक्शन टूल का सहारा लिया गया, जिसने इस वीडियो को 95% एआई संभावित बताया।

अधिक पुष्टि के लिए 'एआईऑरनॉट' और 'साइट इंजन' जैसे फॉरेंसिक टूल्स का भी उपयोग किया गया। इन सभी तकनीकी जांचों ने स्पष्ट किया कि वीडियो के कीफ्रेम्स किसी वास्तविक कैमरे द्वारा रिकॉर्ड नहीं किए गए हैं, बल्कि एक एल्गोरिदम द्वारा तैयार किए गए हैं।

वास्तविक हमले बनाम फर्जी वीडियो

रॉयटर्स और एएफपी की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सच है कि यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमलों के बाद रूस के बाल्टिक बंदरगाहों (प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा) ने कच्चे तेल की लोडिंग रोक दी है। इन वास्तविक हमलों के वीडियो अलजजीरा और अन्य प्रमुख मीडिया हाउस द्वारा साझा किए गए हैं, जो वायरल हो रहे सीसीटीवी फुटेज से बिल्कुल अलग हैं।

निष्कर्ष: वास्तविक युद्ध की घटनाओं का सहारा लेकर एआई के जरिए डिजिटल भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है और यह वायरल फुटेज पूरी तरह से फर्जी है।

News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor

News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।

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