साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री; अखबार के सपने से 'हिंदी भवन' की स्थापना तक, जानें संघर्ष और सफलता की कहानी
मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। हिंदी भाषा और संस्कृति के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पंत ने इस उपलब्धि पर अपनी वैचारिक यात्रा और संघर्षों को साझा किया।
भोपाल : मध्य प्रदेश की तीन प्रतिष्ठित हस्तियों का इस वर्ष पद्मश्री सम्मान के लिए चयन किया गया है, जिनमें साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कैलाश चंद्र पंत का नाम भी शामिल है।
पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद साहित्यिक जगत और प्रदेशभर में हर्ष का माहौल है। इस उपलब्धि पर कैलाश चंद्र पंत ने भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों के लिए भी गर्व और उत्साह का विषय है।
कैलाश चंद्र पंत ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें एक शिक्षित, संस्कारवान और सांस्कृतिक वातावरण वाला परिवार मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने बताया कि वे विशेष रूप से हिंदी के छात्र रहे हैं। उन्होंने स्नातक स्तर पर राजनीति शास्त्र को विषय के रूप में चुना था और उनके प्रोफेसर एक ईसाई थे, जिन्होंने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
पंत के अनुसार, जब पढ़ाते-पढ़ाते उनके प्रोफेसर शंकराचार्य के दर्शन और विचारों की चर्चा करते थे, तो वे कहा करते थे कि दुनिया के बड़े-बड़े दार्शनिक भी शंकराचार्य की बौद्धिकता के चरणों की धूल के बराबर नहीं हैं। इस मार्गदर्शन और स्नेह ने उनकी राजनीतिक और वैचारिक समझ को समृद्ध किया।
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Follow News Tv India on WhatsAppउन्होंने बताया कि उनके जीवन में भी संघर्ष के कई दौर आए। परिस्थितियों से जूझते हुए उन्होंने स्वयं को स्थापित किया। एक अच्छे अखबार को निकालने की प्रबल इच्छा के चलते उन्होंने एक प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की। हालांकि दैनिक अखबार निकालने का सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन साप्ताहिक अखबार की पूरी तैयारी कर ली गई थी। करीब 20 वर्षों बाद जब उन्हें हिंदी भवन का दायित्व सौंपा गया, तो उन्हें अखबार बंद करने का कठिन निर्णय लेना पड़ा, क्योंकि उस समय उनके सामने हिंदी भवन और अखबार में से किसी एक को चुनने की स्थिति थी।
कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि मित्रों के मजबूत सहयोग से उन्होंने हिंदी भवन को एक विशाल और व्यवस्थित स्वरूप दिया। आज हिंदी भवन साहित्य के निवास के रूप में जाना जाता है, जहां सामान्य सुविधाओं से युक्त 13 कमरे उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि साहित्य और भाषा के लिए इस तरह के कार्य करने से उन्हें गहरा मानसिक संतोष मिलता है और उनके जीवन में आत्मसंतोष की अनुभूति हमेशा बनी रही है।
पंत ने कहा कि वे विचारधारात्मक रूप से हिंदुत्व से जुड़े रहे हैं और उन्होंने हिंदू एकता मंच की भी स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी-कभी ऐसे तत्व सामने आते हैं, जो दूसरों की प्रगति देखकर ईर्ष्या करने लगते हैं, लेकिन धार्मिक प्रवृत्ति का होने के कारण उन्होंने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया कि कौन उनसे आगे बढ़ गया है। उनका मानना है कि अपने कार्यों और विचारों के प्रति ईमानदार रहना सबसे बड़ी उपलब्धि है।
पद्मश्री को लेकर कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि यह पुरस्कार उनके साहित्यिक और सामाजिक जीवन की यात्रा का सम्मान है, जो उन्हें आगे भी भाषा, संस्कृति और समाज के लिए काम करने की प्रेरणा देता रहेगा।