ईरान-अमेरिका में आर-पार! राष्ट्रपति पेज़ेशकियन की ट्रंप को दोटूक: 'खामेनेई पर हमला यानी ईरान से सीधी जंग'
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव चरम पर। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने डोनाल्ड ट्रंप की 'नेतृत्व परिवर्तन' वाली टिप्पणी पर पलटवार करते हुए इसे पूरे राष्ट्र के खिलाफ युद्ध करार दिया है।
तेहरान : ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक कड़वाहट अब सीधे टकराव की ओर बढ़ती दिख रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई को निशाना बनाया गया, तो इसे पूरे ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध 'खुला युद्ध' (Full-scale War) माना जाएगा।
ट्रंप के 'नेतृत्व परिवर्तन' वाले बयान पर पलटवार
यह तीखी प्रतिक्रिया ट्रंप के उस हालिया इंटरव्यू के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान में 'नए नेतृत्व' की आवश्यकता पर जोर दिया था। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया, "हमारे महान नेता पर कोई भी हमला ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध के समान होगा।" उन्होंने ट्रंप की टिप्पणी को संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया।
आर्थिक संकट और 'अमानवीय' प्रतिबंध
पेज़ेशकियन ने ईरान की वर्तमान आर्थिक बदहाली के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा लगाए गए अमानवीय प्रतिबंधों के कारण ईरानी जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रपति ने इसे पश्चिम की पुरानी दुश्मनी का हिस्सा बताया।
ट्रंप बनाम खामेनेई: शब्दों की जंग
इससे पहले, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई ने डोनाल्ड ट्रंप को एक 'अपराधी' घोषित किया था। ईरान का आरोप है कि देश में हाल ही में हुई अशांति और मौतों के पीछे ट्रंप प्रशासन की नीतियां और हस्तक्षेप है।
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Follow News Tv India on WhatsAppवहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन जनता के गुस्से का स्वाभाविक परिणाम हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरानी नेतृत्व डर और हिंसा के बल पर शासन कर रहा है और अब देश को राजनीतिक दबाव व मानवाधिकार उल्लंघन से मुक्ति मिलनी चाहिए।
क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की राह
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिका की 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की नीति और ईरान का कड़ा रुख मध्य पूर्व में किसी बड़े सैन्य या रणनीतिक टकराव की आशंका को बढ़ा रहा है।