उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का नागपुर दौरा: RSS स्मृति भवन में दी श्रद्धांजलि; जानें संबोधन की मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नागपुर में 29वीं भारतीय युवा संसद का उद्घाटन किया। उन्होंने विक्रम संवत 2083 की बधाई दी और संवाद को वैश्विक समस्याओं का समाधान बताया।
नागपुर : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के नागपुर दौरे के दौरान कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और देशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विक्रम संवत 2083 के शुभ अवसर पर वे सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हैं।
नागपुर पहुंचने पर उपराष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, नागपुर नगर निगम की मेयर नीता राजेंद्र ठाकरे सहित कई लोगों ने उनका स्वागत किया। उपराष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका महाराष्ट्र का पहला आधिकारिक दौरा था।
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अपने भाषण में उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में सेवा दे चुके हैं और नागपुर आकर उन्हें घर वापसी जैसा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि नागपुर देश की चेतना में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का जन्मस्थान है।
उन्होंने बताया कि 1925 में विजयादशमी के शुभ अवसर पर डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने यहीं संघ की स्थापना की थी। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका स्वयं का जुड़ाव संघ से रहा है, जिसने उनमें निस्वार्थ सेवा की भावना विकसित की है।
इस दौरान उन्होंने नागपुर स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन में डॉ. हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
अपने संबोधन की शुरुआत में उपराष्ट्रपति ने मंच पर मौजूद सभी गणमान्य व्यक्तियों का अभिवादन किया। इनमें महाराष्ट्र के राज्यपाल, राजस्व मंत्री, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवासु वरेकेडी, भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय संयोजक वासुदेव जोशी और अन्य प्रमुख लोग शामिल थे।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारियां मिली हैं, उनमें उन्होंने हमेशा निस्वार्थ भाव से काम करने का प्रयास किया है।