श्रीलंका के राष्ट्रपति और पीएम मोदी के बीच वार्ता; समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा संकट पर बनी सहमति, ट्रंप से भी हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। इन वार्ताओं का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया का युद्ध और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की सुरक्षा रहा।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक के बाद एक दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल्स के जरिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाए। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के साथ हुई बातचीत में जहां 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति पर जोर दिया गया, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप के साथ वार्ता में वैश्विक शांति बहाली पर चर्चा हुई।
भारत-श्रीलंका वार्ता: समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति दिसानायके के बीच टेलीफोन पर हुई चर्चा में क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम पहलू सामने आए। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों (International Shipping Lines) की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही भारत और श्रीलंका दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए रीढ़ की हड्डी के समान है। वार्ता के दौरान भारत-श्रीलंका ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा भी की गई। प्रधानमंत्री ने साझा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के 'महासागर' (SAGAR) विजन और 'पड़ोसी पहले' की नीति के तहत श्रीलंका के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत: होर्मुज जलडमरूमध्य पर वैश्विक चिंता
श्रीलंकाई राष्ट्रपति से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन किया। यह पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली औपचारिक टेलीफोनिक बातचीत थी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का उपयोगी आदान-प्रदान हुआ। भारत ने स्पष्ट किया कि वह तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाली का पूर्ण समर्थन करता है। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि पूरी दुनिया के लिए 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का खुला, सुरक्षित और सुलभ बना रहना अनिवार्य है।
ऊर्जा सुरक्षा पर संकट और भारत की निर्भरता
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को करीब 25 दिन बीत चुके हैं। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में संभावित ब्लॉकेज या हमलों की चेतावनी ने वैश्विक तेल-गैस सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। भारत के लिए यह संकट इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि देश अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल और गैस इसी क्षेत्र से आयात करता है। किसी भी तरह का व्यवधान सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि भारत लगातार ईरान, अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है।
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Follow News Tv India on WhatsAppशांति की ओर बढ़ते कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया है कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी वैश्विक विवाद का एकमात्र समाधान है। भारत न केवल अपनी सीमाओं की बल्कि अपने व्यापारिक हितों और पड़ोसी देशों के साथ साझा समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए भी सतर्क है। आने वाले दिनों में भारत इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के साथ निरंतर संपर्क में बना रहेगा।