सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म परिवर्तन के बाद SC स्टेटस पर बोले विवेक तन्खा; UCC और पश्चिम एशिया संकट पर भी रखी राय

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने स्पष्ट किया है कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खोने का नियम पुराना है और यह केवल SC वर्ग पर लागू होता है, ST पर नहीं। इसके साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की वकालत की और प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन की सराहना की।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Mar 24, 2026 • 10:26 PM
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म परिवर्तन के बाद SC स्टेटस पर बोले विवेक तन्खा; UCC और पश्चिम एशिया संकट पर भी रखी राय
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने स्पष्ट किया है कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खोने का नियम पुराना है और यह केवल SC वर्ग पर लागू होता है, ST पर नहीं। इसके साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की वकालत की और प्रधानमंत्री के हालिया संबोधन की सराहना की।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म परिवर्तन के बाद SC स्टेटस पर बोले विवेक तन्खा; UCC और पश्चिम एशिया संकट पर भी रखी राय
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म परिवर्तन के बाद SC स्टेटस पर बोले विवेक तन्खा; UCC और पश्चिम एशिया संकट पर भी रखी राय

नई दिल्ली: धर्म परिवर्तन और उससे जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि देश की उच्च न्यायपालिका लंबे समय से इस सिद्धांत को मानती आई है।

धर्म परिवर्तन और आरक्षण: SC बनाम ST का अंतर

विवेक तन्खा ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि यदि अनुसूचित जाति (SC) वर्ग का कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे अपना आरक्षण का दर्जा खोना पड़ता है। उन्होंने इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिलाया: यह नियम केवल अनुसूचित जाति (SC) पर लागू होता है, अनुसूचित जनजाति (ST) पर नहीं। तन्खा ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुराने मामले का उदाहरण देते हुए समझाया कि विवाद इसी बात पर था कि वे स्वयं को एसटी (ST) बताते थे ताकि ईसाई होने के बावजूद उनका दर्जा बरकरार रहे, जबकि विरोधियों का तर्क उन्हें एससी (SC) श्रेणी में रखने का था। उनके अनुसार आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक हालिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी कानूनी स्थिति को दोबारा स्पष्ट और सुधारा है।

यूसीसी (UCC) पर रुख: राज्यवार कानून के बजाय राष्ट्रीय कानून की मांग

गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश होने की खबरों पर विवेक तन्खा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा शासित राज्यों जैसे उत्तराखंड और गुजरात द्वारा अलग-अलग कानून बनाने पर सवाल उठाया। तन्खा ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड एक राष्ट्रीय मुद्दा है और इसे एक राष्ट्रीय कानून के रूप में ही लाया जाना चाहिए। उनके अनुसार भाजपा अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए राज्यवार कानून बनाने का प्रयास कर रही है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी होगा जब यह पूरे देश में एक समान रूप से लागू हो।

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पश्चिम एशिया संकट और प्रधानमंत्री का संबोधन

इजरायल-ईरान संघर्ष और वैश्विक तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में दिए गए भाषण पर विवेक तन्खा ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि संकट के इस समय में पूरे देश का एकजुट रहना अनिवार्य है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि पूरा देश एक साथ खड़ा है। तन्खा ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री के लहजे की सराहना करते हुए कहा कि यह अच्छी बात थी कि उन्होंने इस बार विपक्ष या पूर्व प्रधानमंत्रियों को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री से इसी तरह के गरिमापूर्ण और राष्ट्रहित वाले भाषण की उम्मीद की जाती है।

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महिला आरक्षण बिल पर हेमा मालिनी की प्रतिक्रिया

इसी बीच भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर उत्साह जताया। उन्होंने कहा कि यह बिल लंबे समय से लंबित था और इस बजट सत्र में इसे लाया जाना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कानून के आने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी और शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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