राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भुवनेश्वर में नए न्यायिक न्यायालय परिसर का उद्घाटन, न्याय प्रक्रिया में सुधार की अपील

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 5 दिसंबर 2024 को ओडिशा के भुवनेश्वर में नए न्यायिक न्यायालय परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने न्याय प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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Dec 6, 2024 • 7:26 AM
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भुवनेश्वर में नए न्यायिक न्यायालय परिसर का उद्घाटन, न्याय प्रक्रिया में सुधार की अपील
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 5 दिसंबर 2024 को ओडिशा के भुवनेश्वर में नए न्यायिक न्यायालय परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने न्याय प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भुवनेश्वर में नए न्यायिक न्यायालय परिसर का उद्घाटन, न्याय प्रक्रिया में सुधार की अपील
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भुवनेश्वर में नए न्यायिक न्यायालय परिसर का उद्घाटन, न्याय प्रक्रिया में सुधार की अपील ( Image : PIB )

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 5 दिसंबर 2024 को ओडिशा के भुवनेश्वर में नए न्यायिक न्यायालय परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने न्याय प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

समय पर न्याय: गरीबों के लिए सबसे बड़ी जरूरत

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, “समय पर न्याय न मिलना, न्याय न मिलने के बराबर है। न्याय प्रक्रिया में देरी से सबसे अधिक गरीब वर्ग प्रभावित होता है, क्योंकि उनके पास बार-बार न्यायालय आने के लिए न तो वित्तीय संसाधन होते हैं और न ही शक्ति।”

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय प्रक्रिया को त्वरित बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान निकालना चाहिए।

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भाषाई बाधाओं को तोड़ने की पहल

राष्ट्रपति ने न्याय व्यवस्था में भाषा को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा, “आम नागरिकों को यह समझने में कठिनाई होती है कि उनके वकील क्या बहस कर रहे हैं।" उन्होंने अदालती फैसलों को उड़िया और संथाली भाषाओं में अनुवादित करने की पहल की सराहना की। ये फैसले अब सुप्रीम कोर्ट और ओडिशा हाई कोर्ट की वेबसाइट्स पर उपलब्ध हैं।

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न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी पर जोर

महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ओडिशा की न्यायपालिका में वर्तमान में 48% महिला अधिकारी हैं, और राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संख्या भविष्य में और बढ़ेगी।

न्यायपालिका में संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीक की जरूरत

राष्ट्रपति ने कहा कि आम नागरिकों के लिए भयमुक्त न्यायिक व्यवस्था का निर्माण महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि लोग अक्सर वकीलों और जजों के सामने घबराहट महसूस करते हैं, जिससे वे अपनी बात खुलकर नहीं रख पाते।
नए न्यायालय परिसर में आधुनिक तकनीक और सुविधाओं का उपयोग न्याय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा।

आधुनिक न्यायालय परिसर की विशेषताएं

राष्ट्रपति ने नए न्यायालय परिसर को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परिसर न्यायपालिका के कार्यों को सुगम बनाएगा और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करेगा।

श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का यह कदम न्याय प्रक्रिया को सरल, त्वरित और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी, भाषाई बाधाओं को खत्म करना, और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना न्याय प्रक्रिया में सुधार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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