इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में बढ़ रहा महिलाओं का निवेश, बीते पांच वर्षों में आवंटन 32 प्रतिशत तक पहुंचा
भारतीय महिलाओं के द्वारा इक्विटी म्यूचुअल फंड में आवंटन पांच वर्षों में कुल पोर्टफोलियो का लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गया है, जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट का हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत हो गया है।
नई दिल्ली : भारतीय महिलाओं के द्वारा इक्विटी म्यूचुअल फंड में आवंटन पांच वर्षों में कुल पोर्टफोलियो का लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गया है, जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट का हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी रविवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
वेल्थ मैनेजमेंट फर्म इक्विरस वेल्थ की रिपोर्ट में कहा गया कि पीएमएस और एआईएफ जैसी वैकल्पिक संपत्तियों की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 75-90 प्रतिशत महिलाएं अब बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर अपनी एसेट्स बेचने के बजाय उसे अपने पास रखती हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं बाजार में गिरावट के दौरान चुनिंदा रूप से पूंजी निवेश करती हैं, जो उनके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
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Follow News Tv India on WhatsAppलगभग 35-50 प्रतिशत महिला निवेशक या तो एआई टूल्स का उपयोग नहीं करती हैं या उनका उपयोग केवल सीखने और निगरानी के लिए करती हैं।
यह रिपोर्ट लगभग 55,000 महिला निवेशकों और सभी आयु वर्ग के 100 से अधिक रिलेशनशिप मैनेजरों के साथ हुई बातचीत के आधार पर तैयार की गई है।
वेल्थ मैनेजमेंट फर्म ने रिपोर्ट में कहा कि निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट, सोना और संपत्ति में निवेश करने के बजाय दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों पर आधारित विविध और आवंटन-संचालित पोर्टफोलियो की ओर रुख कर रही हैं।
इक्विरस वेल्थ के एमडी-बिजनेस हेड अंकुर पुंज ने कहा, "भारतीय महिला निवेशक अपने वित्तीय भविष्य को आकार देने में अधिक जागरूक, आत्मविश्वासी और रणनीतिक बन रही हैं।"
पुंज ने आगे कहा कि एआई सीखने और रिसर्च प्रक्रिया में भूमिका निभाना शुरू कर चुका है, लेकिन अनुशासित ढांचे और मानवीय विवेक निवेश निर्णयों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
निवेशक तेजी से "बकेट थिंकिंग" को अपना रहे हैं - व्यक्तिगत उत्पादों के बजाय सुरक्षा, वृद्धि, तरलता और विरासत जैसे जीवन लक्ष्यों के आधार पर पोर्टफोलियो बना रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि महिला निवेशकों ने जोखिम की परिभाषा को पांच साल पहले के "मूलधन की हानि" से बदलकर मुद्रास्फीति के कारण होने वाली गिरावट, वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में विफलता, पोर्टफोलियो से पैसे निकालने और वसूली में लगने वाले समय के साथ-साथ पारिवारिक संपत्ति संरचनाओं के भीतर शासन संबंधी जोखिमों को भी शामिल कर लिया है।