शेख हसीना को मिलेगी मौत की सजा? सुप्रीम कोर्ट 20 जनवरी को करेगा सजा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई

बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल की उम्रकैद की सजा को मौत की सजा में बदलने वाली अपील पर सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है। आईसीटी अभियोजक ने 'जुलाई विद्रोह' के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए फांसी की मांग की है।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Jan 16, 2026 • 7:53 AM
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शेख हसीना को मिलेगी मौत की सजा? सुप्रीम कोर्ट 20 जनवरी को करेगा सजा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई
बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल की उम्रकैद की सजा को मौत की सजा में बदलने वाली अपील पर सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है। आईसीटी अभियोजक ने 'जुलाई विद्रोह' के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए फांसी की मांग की है।
Full Story: https://newstvindia.in/will-sheikh-hasina-get-the-death-penalty-supreme-court-to-hear-plea-for-enhancement-of-sentence-on-january-20
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शेख हसीना को मिलेगी मौत की सजा? सुप्रीम कोर्ट 20 जनवरी को करेगा सजा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई
शेख हसीना को मिलेगी मौत की सजा? सुप्रीम कोर्ट 20 जनवरी को करेगा सजा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई
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ढाका : बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की उम्रकैद की सजा को मौत में बदलने वाली याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई होगी। बांग्लादेशी मीडिया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने गुरुवार को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) के अभियोजक की अपील पर सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है।

इस अपील में शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को जुलाई में हुए सामूहिक विद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मिली सजा को बढ़ाने की मांग की गई है। अपीलेट डिवीजन के जज-इन-चैंबर जस्टिस एमडी रेजाउल हक की ओर से दिए गए ऑर्डर में कहा गया, "सुनवाई की तारीख 20 जनवरी को तय की गई है।"

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जल्दी सुनवाई करने की अपील पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया है। यह मामला सुबह अपीलेट डिवीजन चैंबर जज कोर्ट की कॉज लिस्ट में आइटम नंबर 58 के तौर पर लिस्टेड था। आईसीटी अभियोजन ने 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन में अपील फाइल की।

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अपील में अभियोजक ने जुलाई में हुई हिंसा के दौरान किए गए मानवता के खिलाफ अपराधों के कुछ मामलों में उनकी सजा को बढ़ाकर मौत की सजा देने की मांग की थी।

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आईसीटी अभियोजक गाजी एमएच तममी ने कहा था कि जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा काफी नहीं है और इसकी जगह मौत की सजा दी जानी चाहिए। हसीना और कमाल के लिए मौत की सजा की अपील के बाद ट्रिब्यूनल परिसर में एक प्रेस ब्रीफिंग में तममी ने कहा था, "पहला फैसला फिर से बने आईसीटी में सुनाया गया था। जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में, हसीना और कमाल को सजा सुनाई गई थी। उन्हें एक आरोप में उम्रकैद और दूसरे में मौत की सजा मिली थी।"

उन्होंने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय अदालत में अपील की है कि उम्रकैद की जगह मौत की सजा दी जाए। इसके लिए आठ वजहें बताई गई हैं। फैसला आने के तीस दिनों के अंदर अपील फाइल करनी होती है। हमने यह पहले ही कर दिया था। अपील के 60 दिनों के अंदर सेटलमेंट का नियम है। मुझे उम्मीद है कि इस अपील का निपटारा समय के अंदर हो जाएगा।"

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बता दें कि 17 नवंबर को दिए गए इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 ने दोनों नेताओं को एक बड़े आरोप में मौत की सजा और एक अलग आरोप में प्राकृतिक तरीके से मौत तक जेल की सजा सुनाई थी।

अपील दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सोमवार को तमीम ने कहा था, "हमने आज 8 वजहों से अपील फाइल की है ताकि उन आरोपों में सजा बढ़ाई जा सके, जिनमें उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई थी।"

News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor

News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।

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