माधवपुर मेला 2026: 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का प्रतीक; पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं, बताया गुजरात और पूर्वोत्तर का अटूट रिश्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पोरबंदर में आयोजित हो रहे ऐतिहासिक माधवपुर मेले के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पोरबंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए सभी को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह उत्सव विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "गुजरात के पोरबंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। यह जीवंत उत्सव हमारी गौरवशाली संस्कृति को उजागर करता है और साथ ही, यह गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच के शाश्वत सांस्कृतिक बंधन को और भी सुदृढ़ बनाता है। यह उत्सव विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं लोगों से इस मेले में पधारने का आग्रह करता हूं।"
My best wishes for the ongoing Madhavpur Mela taking place in Porbandar, Gujarat.
This vibrant celebration highlights our glorious culture and at the same time it reinforces the timeless cultural bond between Gujarat and the Northeast.
This festival brings together diverse… https://t.co/KiqLe29UIB pic.twitter.com/xRxiPJ21lY— Narendra Modi (@narendramodi) March 29, 2026क्या आप WhatsApp पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
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इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने 27 मार्च 2022 के 'मन की बात' कार्यक्रम का एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने माधवपुर मेले का जिक्र किया था। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "2022 के 'मन की बात' कार्यक्रम में मैंने माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में इसकी अहमियत के बारे में बात की थी।"
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा था, "माधवपुर मेला कहां लगता है, क्यों लगता है, कैसे ये भारत की विविधता से जुड़ा है, ये जानना 'मन की बात' के श्रोताओं को बहुत दिलचस्प लगेगा। माधवपुर मेला, गुजरात के पोरबंदर में समुद्र के पास माधवपुर गांव में लगता है। लेकिन इसका हिंदुस्तान के पूर्वी छोर से भी नाता जुड़ता है। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे संभव है? तो इसका भी उत्तर एक पौराणिक कथा से ही मिलता है। कहा जाता है कि हजारों वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण का विवाह नार्थ ईस्ट की राजकुमारी रुक्मणि से हुआ था। ये विवाह पोरबंदर के माधवपुर में संपन्न हुआ था और उसी विवाह के प्रतीक के रूप में आज भी वहां माधवपुर मेला लगता है।"
उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा, "पूर्व और पश्चिम का ये गहरा नाता, हमारी धरोहर है। समय के साथ अब लोगों के प्रयास से, माधवपुर मेले में नई-नई चीजें भी जुड़ रही हैं। हमारे यहां कन्या पक्ष को घराती कहा जाता है और इस मेले में अब नार्थ ईस्ट से बहुत से घराती भी आने लगे हैं। एक सप्ताह तक चलने वाले माधवपुर मेले में नार्थ ईस्ट के सभी राज्यों के आर्टिस्ट पहुंचते हैं, हेंडीक्राफ्ट से जुड़े कलाकार पहुंचते हैं और इस मेले की रौनक को चार चांद लग जाते हैं। एक सप्ताह तक भारत के पूरब और पश्चिम की संस्कृतियों का ये मेल, ये माधवपुर मेला, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की बहुत सुंदर मिसाल बना रहा है। मेरा आपसे आग्रह है, आप भी इस मेले के बारे में पढ़ें और जानें।"
बता दें कि भगवान कृष्ण और रुक्मिणी जी के विवाह की स्मृति में मनाए जाने वाले प्रसिद्ध माधवपुर मेले का उद्घाटन 27 मार्च को हुआ, जो 5 दिन चलता है।