UGC रेगुलेशन 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट करेगा 'भेदभाव विरोधी' नियमों की समीक्षा, याचिका में उठाए गए गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट UGC के उन नए नियमों पर सुनवाई को तैयार, जिन पर 'सामान्य वर्ग' को शिकायत तंत्र से बाहर रखने का आरोप है। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच करेगी नियमों की संवैधानिक समीक्षा।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Jan 28, 2026 • 12:58 PM
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UGC रेगुलेशन 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट करेगा 'भेदभाव विरोधी' नियमों की समीक्षा, याचिका में उठाए गए गंभीर सवाल
सुप्रीम कोर्ट UGC के उन नए नियमों पर सुनवाई को तैयार, जिन पर 'सामान्य वर्ग' को शिकायत तंत्र से बाहर रखने का आरोप है। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच करेगी नियमों की संवैधानिक समीक्षा।
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UGC रेगुलेशन 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट करेगा 'भेदभाव विरोधी' नियमों की समीक्षा, याचिका में उठाए गए गंभीर सवाल
UGC रेगुलेशन 2026 विवाद: सुप्रीम कोर्ट करेगा 'भेदभाव विरोधी' नियमों की समीक्षा, याचिका में उठाए गए गंभीर सवाल
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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर जल्द सुनवाई करने पर सहमति जताई। यूजीसी ने 13 जनवरी को 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026' लागू किया। इसके तहत कई संस्थानों को समता समिति बनाने और भेदभाव विरोधी नीति लागू करने के निर्देश दिए गए थे।

जनहित याचिका मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की बेंच के सामने पेश की गई थी। सीजेआई ने कहा, "हमें मामले के बारे में जानकारी है।" उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा, "आप यह सुनिश्चित करें कि कमियों (पीएलआई में) को दूर किया जाए। हम इस पर सुनवाई करेंगे।"

इन नियमों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि ये 'सामान्य वर्ग' के छात्रों को अपनी शिकायत निवारण तंत्र के तहत शिकायत करने से रोकते हैं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि ये नियम भेदभावपूर्ण हैं, क्योंकि ये अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी से संबंधित नहीं होने वालों को शिकायत निवारण और संस्थागत सुरक्षा से वंचित करते हैं।

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याचिकाकर्ता ने अपने मौजूदा स्वरूप में नियमों के कार्यान्वयन को रोकने के लिए निर्देश मांगा है। याचिका में अपील की गई कि जाति पहचान के आधार पर शिकायत निवारण तंत्र तक पहुंच से इनकार करना अस्वीकार्य राज्य भेदभाव के बराबर है। याचिका में कहा गया है कि यह चयनात्मक ढांचा न सिर्फ माफ करता है बल्कि गैर-आरक्षित कैटेगरी के खिलाफ अनियंत्रित दुश्मनी को प्रभावी ढंग से प्रोत्साहित करता है, जिससे नियम समानता के बजाय विभाजन का एक उपकरण बन जाते हैं।

बता दें कि इन नियमों को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं और आवेदन दायर किए गए हैं। राहुल दीवान और अन्य बनाम संघ का मामला उठाया गया।

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