झारखंड पेसा नियमावली पर सियासी घमासान: चंपई सोरेन ने बताया 'धोखा', कांग्रेस ने कहा- ऐतिहासिक कदम

झारखंड में 25 साल बाद लागू हुए पेसा (PESA) कानून पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। चंपई सोरेन ने इसे आदिवासियों के अधिकारों पर चोट बताया है, तो वहीं कांग्रेस ने इसे स्वशासन की दिशा में एक बड़ी जीत करार दिया है। जानें क्या है पूरा विवाद।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Jan 6, 2026 • 8:52 PM
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झारखंड पेसा नियमावली पर सियासी घमासान: चंपई सोरेन ने बताया 'धोखा', कांग्रेस ने कहा- ऐतिहासिक कदम
झारखंड में 25 साल बाद लागू हुए पेसा (PESA) कानून पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। चंपई सोरेन ने इसे आदिवासियों के अधिकारों पर चोट बताया है, तो वहीं कांग्रेस ने इसे स्वशासन की दिशा में एक बड़ी जीत करार दिया है। जानें क्या है पूरा विवाद।
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झारखंड पेसा नियमावली पर सियासी घमासान: चंपई सोरेन ने बताया 'धोखा', कांग्रेस ने कहा- ऐतिहासिक कदम
झारखंड पेसा नियमावली पर सियासी घमासान: चंपई सोरेन ने बताया 'धोखा', कांग्रेस ने कहा- ऐतिहासिक कदम
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रांची : झारखंड में 25 वर्षों बाद लागू की गई पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया एक्ट) नियमावली को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। एक ओर भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने इसे आदिवासी समाज के साथ धोखा करार दिया है, वहीं कांग्रेस ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे आदिवासी स्वशासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। दोनों दलों के नेताओं ने मंगलवार को अलग-अलग संवाददाता सम्मेलनों में एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।

भाजपा नेता चंपई सोरेन ने कहा कि पेसा कानून का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों और स्वशासन की रक्षा करना था, लेकिन राज्य सरकार ने नियमावली बनाते समय उसकी मूल भावना को ही कमजोर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमावली के पहले पन्ने से ही रूढ़ि प्रथा को हटाकर आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था और अधिकारों पर चोट पहुंचाई गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ग्राम सभा को सशक्त बनाने के बजाय उसे कमजोर कर दिया है। सीएनटी से जुड़े मामलों में जहां पहले ग्राम सभा की निर्णायक भूमिका होती थी, वहीं अब यह अधिकार उपायुक्त को सौंप दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की आबादी लगातार घट रही है, ऐसे में पेसा नियमावली में पुस्तैनी जमीन और पारंपरिक व्यवस्था को गौण करना गंभीर चिंता का विषय है। चंपई सोरेन ने आशंका जताई कि इससे आगे चलकर सीएनटी और एसपीटी जैसे सुरक्षा कानून भी निष्प्रभावी हो सकते हैं।

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वहीं, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पेसा कानून केवल एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी स्वशासन की आत्मा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक शासन किया, उनके कार्यकाल में न तो आदिवासियों की जमीन सुरक्षित रही, न जंगल और न ही उनके अधिकार। आज वही लोग पेसा को लेकर भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पेसा नियमावली बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही और जनता, सामाजिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों से व्यापक विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना पेसा को ठीक से पढ़े और समझे, भाजपा नेता भ्रामक और भावनात्मक बातें फैलाकर आदिवासी समाज को आपस में बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन के दौरान लाखों एकड़ आदिवासी जमीन को लैंड बैंक में डालकर पूंजीपतियों को सौंपने की साजिश रची गई थी।

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News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।

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