खाड़ी में युद्ध का संकट: क्या फिर महंगी होगी आपकी जेब? जानें एसबीआई की डराने वाली रिपोर्ट

खाड़ी देशों में बढ़ते संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर। एसबीआई रिसर्च ने तेल की कीमतों और जीडीपी में गिरावट की चेतावनी दी है।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Mar 7, 2026 • 4:24 PM
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खाड़ी में युद्ध का संकट: क्या फिर महंगी होगी आपकी जेब? जानें एसबीआई की डराने वाली रिपोर्ट
खाड़ी देशों में बढ़ते संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर। एसबीआई रिसर्च ने तेल की कीमतों और जीडीपी में गिरावट की चेतावनी दी है।
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खाड़ी में युद्ध का संकट: क्या फिर महंगी होगी आपकी जेब? जानें एसबीआई की डराने वाली रिपोर्ट
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नई दिल्ली: खाड़ी देशों में छिड़ा सैन्य संघर्ष अब केवल युद्ध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है। इज़राइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है। एसबीआई (SBI) रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह विवाद लंबा खिंचता है, तो दुनिया को महंगाई और आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भारत की चुनौती

रिपोर्ट में सबसे बड़ी चेतावनी कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) को लेकर दी गई है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होता है। संघर्ष के कारण इस मार्ग में बाधा आने से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 91.84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।

एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि:

• अगर तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है, तो भारत के चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़ जाएगा।

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• यदि तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर घटकर 6 प्रतिशत तक गिर सकती है।

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आरबीआई (RBI) का सुरक्षा कवच

वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, भारतीय बाजारों के लिए राहत की बात यह है कि रिजर्व बैंक (RBI) पूरी तरह मुस्तैद है। आरबीआई ने रुपए की कीमत को गिरने से बचाने के लिए बाजार में दखल दिया है और इसे 92 के स्तर से नीचे रखने में कामयाबी हासिल की है। इसके अलावा, सरकारी बॉन्ड के रेट्स को संतुलित रखकर वित्तीय बाजार को टूटने से बचाया गया है।

किसे होगा फायदा और किसे नुकसान?

रिपोर्ट में एक दिलचस्प पहलू यह भी बताया गया है कि इस युद्ध से कुछ देशों को फायदा भी हो सकता है।

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1. अमेरिका: तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से अमेरिका को लाभ मिल सकता है क्योंकि वह एक बड़ा उत्पादक है।

2. यूरोप: रूस पर ऊर्जा निर्भरता कम होने से यूरोप के लिए नए विकल्प खुलेंगे।

3. भारत और अन्य देश: बढ़ती महंगाई और सप्लाई चेन टूटने से ज्यादातर देशों की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

सुरक्षित निवेश के लिए सोने पर भरोसा

बाजार में बढ़ते जोखिम को देखते हुए दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अब सोने (Gold) का भंडार बढ़ा रहे हैं। भारत भी इस मामले में पीछे नहीं है। वर्तमान में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 17.6 प्रतिशत हिस्सा सोने के रूप में सुरक्षित रखा गया है। यह कदम मुश्किल समय में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उठाया गया है।

हालांकि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदकर और एडवांस कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए अपनी सप्लाई सुरक्षित करने की कोशिश की है, लेकिन खाड़ी देशों से आने वाले धन (रेमिटेंस) और व्यापार पर असर पड़ना तय है। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में निवेशकों और सरकार को बहुत संभलकर कदम उठाने की जरूरत है।

News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor

News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।

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