राज कपूर की आंखें नम हुईं, पंकज उधास ने गाया 'चिट्ठी आई है' और बदल दी गजल की दुनिया
पंकज उधास भारतीय संगीत जगत के उन गायकों में से थे, जिन्होंने अपने गायन से करोड़ों लोगों का दिल जीता। उन्होंने अपने करियर में कई गाने और गजलें ऐसी गाईं, जो आज भी याद की जाती हैं, लेकिन एक ऐसा गाना है
नई दिल्ली : पंकज उधास भारतीय संगीत जगत के उन गायकों में से थे, जिन्होंने अपने गायन से करोड़ों लोगों का दिल जीता। उन्होंने अपने करियर में कई गाने और गजलें ऐसी गाईं, जो आज भी याद की जाती हैं, लेकिन एक ऐसा गाना है, जिसने उन्हें असली पहचान दी। यह गाना है 'चिट्ठी आई है', जो 1986 में रिलीज हुई फिल्म 'नाम' का है। इस गाने के पीछे का किस्सा बड़ा ही दिलचस्प है।
शुरुआत में पंकज उधास को फिल्म के लिए इस गजल को गाने में कोई खास रुचि नहीं थी। उनको लगता था कि यह गाना उनके लिए कोई बड़ा बदलाव नहीं लाएगा, लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था।
जब यह गाना राज कपूर के पास गया और उन्होंने इसे पंकज उधास से गाने की इच्छा जाहिर की, तो पंकज ने जब इस गाने को गाया, तो वह भावुक हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि इस गाने में जो भाव और एहसास है, वह किसी और के लिए गाना नामुमकिन है। राज कपूर की यह प्रतिक्रिया पंकज उधास के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई।
पंकज उधास के करियर को 'चिट्ठी आई है' ने नया उछाल दिया। इस गाने के बाद पंकज को फिल्मों और गजल के मंचों में लगातार अवसर मिलने लगे। लोग उन्हें सिर्फ फिल्मों के गायक के रूप में नहीं बल्कि गजल के जादूगर के रूप में भी जानने लगे। उनकी गजल में प्यार, रोमांस और जज्बातों की मिठास होती थी।
क्या आप WhatsApp पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
WhatsApp पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।
Follow News Tv India on WhatsAppपंकज उधास को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले। 2006 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया और 2025 में उन्हें पद्मभूषण से नवाजा गया। उनके गानों और गजल के लिए उन्हें देश-विदेश में ख्याति मिली।
उनका निधन 26 फरवरी 2024 को मुंबई में हुआ, लेकिन उनकी आवाज और गज़लें आज भी लोगों के दिलों में बरकरार हैं।