चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन: सोशल मीडिया और डिजिटल विज्ञापनों पर अब 'MCMC' का कड़ा पहरा

आगामी विधानसभा चुनावों की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन जारी करने से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) से 'प्री-सर्टिफिकेशन' यानी पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Mar 20, 2026 • 3:25 PM
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चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन: सोशल मीडिया और डिजिटल विज्ञापनों पर अब 'MCMC' का कड़ा पहरा
आगामी विधानसभा चुनावों की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन जारी करने से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) से 'प्री-सर्टिफिकेशन' यानी पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
Full Story: https://newstvindia.in/ec-s-new-guideline-mcmc-tightened-vigil-on-social-media-and-digital-advertisements
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चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन: सोशल मीडिया और डिजिटल विज्ञापनों पर अब 'MCMC' का कड़ा पहरा
चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन: सोशल मीडिया और डिजिटल विज्ञापनों पर अब 'MCMC' का कड़ा पहरा
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नई दिल्ली : आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब सभी राजनीतिक विज्ञापनों को जारी करने से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से प्री-सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य होगा।

चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए यह निर्देश जारी किए गए हैं।

आयोग के अनुसार कोई भी पंजीकृत राजनीतिक दल, संगठन, उम्मीदवार या व्यक्ति टीवी, रेडियो, सार्वजनिक स्थानों पर ऑडियो-वीडियो डिस्प्ले, ई-पेपर, बल्क एसएमएस/वॉयस मैसेज और सोशल मीडिया जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर विज्ञापन जारी करने से पहले एमसीएमसी से अनुमति लेगा। बिना प्री-सर्टिफिकेशन के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन इंटरनेट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी नहीं किया जा सकेगा।

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उम्मीदवार अपने विज्ञापनों के प्रमाणन के लिए जिला स्तर की एमसीएमसी में आवेदन कर सकते हैं जबकि राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में मुख्यालय रखने वाले राजनीतिक दल राज्यस्तरीय एमसीएमसी से अनुमति लेंगे। इसके साथ ही, जिला या राज्य एमसीएमसी के फैसलों के खिलाफ अपील के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में एक अपीलीय समिति भी बनाई गई है।

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चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि एमसीएमसी मीडिया में पेड न्यूज के संदिग्ध मामलों पर कड़ी नजर रखेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी।

इसके अलावा, सभी उम्मीदवारों को नामांकन के समय अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी हलफनामे में देना अनिवार्य होगा, ताकि चुनावी प्रचार पर निगरानी रखी जा सके।

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लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों को चुनाव खत्म होने के 75 दिनों के भीतर इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए किए गए प्रचार-प्रसार पर खर्च का पूरा विवरण चुनाव आयोग को देना होगा। इसमें इंटरनेट कंपनियों को दिए गए भुगतान, विज्ञापन खर्च, कंटेंट निर्माण और सोशल मीडिया संचालन से जुड़े सभी खर्च शामिल होंगे।

इस संबंध में 19 मार्च को चुनाव आयोग ने सभी चुनावी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, राज्य पुलिस नोडल अधिकारियों, आईटी नोडल अधिकारियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की। इस बैठक का उद्देश्य चुनाव के दौरान फेक न्यूज, गलत सूचना और भ्रामक खबरों पर समय रहते रोक लगाना और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना था।

News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor

News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।

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