'भारत में सुरक्षा 100% पक्की', बांग्लादेश के वर्ल्ड कप बहिष्कार पर अजय आलोक का पलटवार; डोडा हादसे और कर्नाटक विवाद पर भी बोले
भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने बांग्लादेश टीम के सुरक्षा दावों को खारिज करते हुए कहा कि क्रिकेट को राजनीति से दूर रखना चाहिए। उन्होंने डोडा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी और कर्नाटक के राज्यपाल के वॉकआउट का समर्थन किया।
नई दिल्ली : भारत में होने वाले आगामी टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के हिस्सा नहीं लेने पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने गुरुवार को इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "भारत में आतंरिक सुरक्षा और विदेशियों की सुरक्षा 100 प्रतिशत सुनिश्चित की जाती है। हम वह देश नहीं हैं, जहां पर विदेशियों के आने पर उन्हें अपने जान की चिंता हो। ऐसे में उनके द्वारा यह कहना कि वे भारत में सुरक्षित नहीं हैं, ये उनकी कमजोरी को दर्शाता है। उनके देश में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं, यह पूरा विश्व जान चुका है।"
उन्होंने कहा, "खेल प्रेमियों की भावना को आहत करना किसी भी सरकार को शोभा नहीं देता है। क्रिकेट राजनीति की चीज नहीं है। क्रिकेट एक खेल है, और राजनीति से इसे दूर रखना चाहिए। मुझे विश्वास है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के इस फैसले से करोड़ों बांग्लादेशियों का दिल टूट गया होगा।"
अजय आलोक ने जम्मू-कश्मीर के डोडा में सेना की गाड़ी के खाई में गिरने से 10 जवानों के शहीद होने पर दुख जताया। उन्होंने कहा, "यह बहुत दुखद त्रासदी है। शहीद हुए जवानों को हम श्रद्धांजलि देते हैं और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। जम्मू-कश्मीर और भारत सरकार इस घटना पर लगातार नजर रख रही हैं और घायलों को उचित सुविधा दी जा रही है।"
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Follow News Tv India on WhatsAppभाजपा प्रवक्ता ने सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज के एक दिन पड़ने पर कहा, "दोनों समुदाय की जिम्मेदारी है कि वे साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए। यह भारत की खूबसूरती भी है। मुझे उम्मीद है कि दोनों समुदाय के लोग शांतिपूर्ण तरीके से बसंत पंचमी भी मनाएंगे और जुमे की नमाज भी अदा करेंगे।"
उन्होंने कर्नाटक के राज्यपाल द्वारा बिना स्पीच पढ़े विधानसभा से निकलने पर कहा, "कर्नाटक या अन्य राज्य जहां विपक्ष की सरकार है, वहां पर अराजकता की एक सीमा पार करते जा रहे हैं। जिस विधानसभा में राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत का अपमान हो, वहां पर राज्यपाल कैसे काम कर सकते हैं? ऐसे में उन्होंने यह बेहतर समझा कि संविधान का निर्वहन करते हुए सदन का वॉकआउट करना उनके लिए उपयुक्त रहेगा। इसपर कर्नाटक सरकार को सोचना चाहिए।"