श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से गूंजा विवेक विहार — मनाया गया महावीरजन्म कल्याणक
श्री संभवनाथ राजेन्द्र जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजकसंघ, विवेक विहार में महावीर जन्म कल्याणक का पावन पर्व अत्यंतश्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस आयोजन को सफलबनाने में बालिका मंडल और युवा मंडल की अहम भूमिका रही, जिनकीमिलकर की गई मेहनत से यह कार्यक्रम अत्यंत भव्य और प्रेरणादायकबना।
नई दिल्ली: श्री संभवनाथ राजेन्द्र जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ, विवेक विहार में महावीर जन्म कल्याणक का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दिव्य आयोजन को सफल बनाने में बालिका मंडल और युवा मंडल की भूमिका सराहनीय रही। उनके समर्पण और सहयोग से यह कार्यक्रम अत्यंत भव्य और प्रेरणास्पद बन पाया।
महावीर जयंती नहीं, ‘महावीर जन्म कल्याणक’ है सही नाम
जनमानस में आमतौर पर जिसे महावीर जयंती कहा जाता है, उसका शुद्ध और धार्मिक नाम महावीर जन्म कल्याणक है। यह दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म दिवस के रूप में श्रद्धा से मनाया जाता है। भगवान महावीर के उपदेश – अहिंसा, सत्य और करुणा – आज भी समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करते हैं।
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धार्मिक शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
इस अवसर पर एक भव्य रथ यात्रा का आयोजन भी हुआ, जिसमें बच्चों, महिलाओं, युवाओं सहित संपूर्ण जैन समाज ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्ति गीतों, मंगल ध्वनियों और जयकारों के साथ यह शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में धर्म की ऊर्जा फैलाती रही।
नवपद की ओली से जुड़ा है महावीर जन्म कल्याणक
यह पर्व हर वर्ष चैत्र सुदी तेरस को मनाया जाता है, जो शाश्वत नवपद जी की ओली के सातवें दिन आता है। नवपद की ओली जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र नौदिवसीय पर्व है, जिसे शाश्वत पर्व कहा जाता है – ऐसा पर्व जो कालचक्र में कभी समाप्त नहीं होता। इस आध्यात्मिक संयोग के कारण इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
विवेक विहार जैन समाज की एकता बनी आयोजन की शक्ति
इस आयोजन की सफलता का श्रेय विवेक विहार जैन समाज की एकजुटता, भक्ति और सेवा भावना को जाता है। हर आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस पर्व को अविस्मरणीय बना दिया।