Bhojshala Dispute: "अब हिंदू जाग चुका है", भोजशाला विवाद पर साध्वी प्रज्ञा का बड़ा बयान; सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया 'अस्थायी व्यवस्था'
भोजशाला विवाद पर पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि यह माँ सरस्वती का स्वतंत्र मंदिर है। उन्होंने मुगलकाल और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हिंदुओं के मंदिरों का अपमान अब और स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भोपाल : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोजशाला विवाद को लेकर कहा है कि यह मां सरस्वती का स्थायी मंदिर है। यहां शांति से पूजा जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू अपने धर्म में दखलअंदाजी स्वीकार नहीं करेगा।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट का बहुत सम्मान करती हूं। यह एक संवैधानिक संस्था है। हालांकि, भोजशाला मामले में उसका फैसला अस्थायी है। सिर्फ एक व्यवस्था बनाई गई है, जिससे वे (मुस्लिम पक्ष) अपनी नमाज पढ़ सकें और हम अपने धर्म के अनुसार पूजा कर सकें।"
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में साध्वी प्रज्ञा सिंह ने कहा कि परतंत्र काल में सरस्वती मंदिर पर कुठाराघात हुआ था। आज भी उस मंदिर के साथ न्याय नहीं हुआ है। हिंदू समाज को हमेशा से दबाया और सताया गया है। पूर्व सांसद ने कहा कि आज हिंदू समाज जाग चुका है, जिसे अपने देवी-देवताओं या मंदिरों के अपमान का बदला नहीं लेना है, बल्कि उस दाग को हटाकर फिर से मंदिरों के वैभव को लौटाकर लाना है।
उन्होंने कहा, "यह मां सरस्वती का मंदिर था, जिस तरह से वर्तमान में उसे रखा जा रहा है। अब हिंदू प्रयास कर रहे हैं। मंदिर का स्थायी हल निकलना जरूरी है। हमें अपना मंदिर स्वतंत्र चाहिए। मुगल काल में जिस तरह मंदिरों के अपमान के लिए मस्जिदें खड़ी की गईं, वह अब स्वीकार नहीं होना चाहिए।"
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Follow News Tv India on WhatsAppकांग्रेस पर निशाना साधते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कभी इस मंदिर पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि हिंदुओं और सनातन धर्म के ऊपर कुठाराघात किया। दशकों से यही देखा गया है कि कभी भी हिंदुओं के साथ न्याय नहीं हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि यह हमारी मां सरस्वती का स्थायी मंदिर है। इसे बिना किसी रुकावट के रहना चाहिए, और यहां शांति से पूजा जारी रहनी चाहिए। किसी भी तरह की पाबंदी की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत आजाद है। हर किसी को अपनी पूजा पद्धति का पालन करने की आजादी है। उन्होंने कहा, "हिंदू धर्म में समुदायों और संप्रदायों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन हमने कभी भी हिंदू धर्म में दखलअंदाजी स्वीकार नहीं की है और न ही कभी करेंगे।"