Gavi Gangadhareshwara: बेंगलुरु का चमत्कारी मंदिर, जहाँ मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें स्वयं करती हैं शिवलिंग का राजतिलक

मकर संक्रांति पर बेंगलुरु के गवी गंगाधरेश्वर मंदिर में विज्ञान और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। साल में सिर्फ एक बार सूर्य की किरणें नंदी के सींगों से होकर सीधे शिवलिंग को छूती हैं। जानें इस 3000 साल पुराने गुफा मंदिर की अनोखी परंपरा और दही प्रसाद का रहस्य।

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News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Jan 9, 2026 • 9:29 PM
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Gavi Gangadhareshwara: बेंगलुरु का चमत्कारी मंदिर, जहाँ मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें स्वयं करती हैं शिवलिंग का राजतिलक
मकर संक्रांति पर बेंगलुरु के गवी गंगाधरेश्वर मंदिर में विज्ञान और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। साल में सिर्फ एक बार सूर्य की किरणें नंदी के सींगों से होकर सीधे शिवलिंग को छूती हैं। जानें इस 3000 साल पुराने गुफा मंदिर की अनोखी परंपरा और दही प्रसाद का रहस्य।
Full Story: https://newstvindia.in/the-miraculous-temple-of-bengaluru-where-the-rays-of-the-sun-on-makar-sankranti-do-themselves-the-coronation-of-the-shivling
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Gavi Gangadhareshwara: बेंगलुरु का चमत्कारी मंदिर, जहाँ मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें स्वयं करती हैं शिवलिंग का राजतिलक
Gavi Gangadhareshwara: बेंगलुरु का चमत्कारी मंदिर, जहाँ मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें स्वयं करती हैं शिवलिंग का राजतिलक
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नई दिल्ली : देश के हर हिस्से में भगवान शिव के कई चमत्कारी मंदिर मौजूद हैं, जहां भक्त अपने कष्टों से छुटकारा पाने के लिए आते हैं। बेंगलुरु में भगवान शिव का ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां मकर संक्रांति के मौके पर सूर्य निर्धारित समय पर शिवलिंग का तिलक करते हैं।

हम बात कर रहे हैं गवी गंगाधरेश्वर मंदिर की, जहां विज्ञान पर आस्था भारी पड़ती दिखती है। कर्नाटक के बेंगलुरु गाविपुरम में महादेव को समर्पित गवी गंगाधरेश्वर मंदिर है, जिसे तीन हजार साल पुराना बताया जाता है। "गवी" का अर्थ है "गुफा," और "गंगाधरेश्वर" का अर्थ है "महादेव।" यहां बाबा गुफानुमा मंदिर के अंदर विराजमान हैं, लेकिन मकर संक्रांति के दिन यहां कुछ ऐसा होता है, जो साल में सिर्फ एक बार होता है।

मकर संक्रांति को शाम 5 बजे के आसपास जब सूरज ढलने की स्थिति में होता है, तब सूर्य की किरणें पहले मंदिर के बाहर लगे स्तंभों से टकराकर मंदिर के अंदर प्रवेश करती हैं और फिर नंदी महाराज के सींग को छूते हुए सीधे गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग को छूती हैं।

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साल में एक बार ही ऐसा होता है, जब बाहर का प्रकाश मंदिर में इस तरीके से पहुंचता है। माना जाता है कि अपनी दिशा बदलने के साथ सूर्य भगवान महादेव का राजतिलक कर आशीर्वाद लेने आते हैं।

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इस मंदिर की एक और खास बात है कि यहां भगवान शिव पर अर्पित किया गया दूध, छाछ या दही बन जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर प्रशासन भगवान शिव पर चढ़ने वाले दूध का संग्रह करता है और उसका दही बनाकर प्रसाद स्वरूप अगले दिन भक्तों में वितरित कर देता है।

मंदिर प्रशासन का मानना है कि वे किसी भी खाने की वस्तु को बर्बाद करने पर यकीन नहीं रखते हैं। मंदिर के इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा हर तरफ होती है।

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मंदिर प्रशासन इस बात का भी ध्यान रखता है कि दूध में सिंदूर या कोई अन्य चीज न मिले। स्वच्छता के साथ दूध को अलग किया जाता है और उसे फर्मेंट करके छाछ बना दिया जाता है। मंदिर से जुड़े लोग ही दूध का संग्रह करते हैं और स्वच्छ दूध से ही छाछ बनाते हैं।

News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor

News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।

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