मिडल ईस्ट में जंग का 'ऑयल शॉक': ब्रेंट क्रूड ₹82 के पार, क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल?

ईरान-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार। ब्रेंट क्रूड $82 प्रति बैरल पहुँचा। भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ेगा बड़ा असर।

News Tv India हिंदी
News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor
Mar 2, 2026 • 11:27 AM
N
News TV India
BREAKING
News Tv India हिंदी
News Tv India हिंदी
30 days ago
मिडल ईस्ट में जंग का 'ऑयल शॉक': ब्रेंट क्रूड ₹82 के पार, क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल?
्रूड ₹82 के पार, क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल?
ईरान-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार। ब्रेंट क्रूड $82 प्रति बैरल पहुँचा। भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ेगा बड़ा असर।
Full Story: https://newstvindia.in/jung-s-oil-shock-in-the-middle-east-brent-crude-crosses-82-will-petrol-cost-more-in-india
https://newstvindia.in/jung-s-oil-shock-in-the-middle-east-brent-crude-crosses-82-will-petrol-cost-more-in-india
Copied
मिडल ईस्ट में जंग का 'ऑयल शॉक': ब्रेंट क्रूड ₹82 के पार, क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल?
मिडल ईस्ट में जंग का 'ऑयल शॉक': ब्रेंट क्रूड ₹82 के पार, क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल?
Advertisement
Advertisement

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में युद्ध तेज होने के बाद सोमवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह उछाल अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद आया।

ब्रेंट क्रूड के वायदा भाव बढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 7.60 प्रतिशत बढ़कर 78.41 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड के वायदा भाव 7.19 प्रतिशत बढ़कर 71.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से होकर गुजरने वाले नौवहन को बंद कर दिया है, जिसके बाद विभिन्न देशों की सरकारें और तेल रिफाइनरियां अपने भंडार का आकलन कर रही हैं।

Advertisement
Advertisement

bolt यह भी पढ़ें

flash_on
दिल्ली जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट से निकला धुआं, लखनऊ में की आपातकालीन लैंडिंग
NEW
flash_on
अमित शाह का लोकसभा में भाषण: नक्सलवाद पर राहुल गांधी और अर्बन नक्सलियों को घेरा
flash_on
सबरीमाला सोना चोरी: राहुल गांधी के आरोप पर भाजपा का पलटवार, वीडियो जारी कर कहा- 'झूठ सामने आया'
flash_on
बंगाल चुनाव: भाजपा ने चुनाव आयोग में की ममता बनर्जी की शिकायत; "प्रशासन और पुलिस पर टीएमसी का कब्जा"
flash_on
मुंडू पहनकर मंच पर पहुंचे PM मोदी, पलक्कड़ में साधा विपक्ष पर निशाना
flash_on
6,000 पीएनजी ग्राहकों ने छोड़ा एलपीजी कनेक्शन, उपलब्धता में होगा सुधार
flash_on
माधवपुर मेला 2026: 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का प्रतीक; पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं, बताया गुजरात और पूर्वोत्तर का अटूट रिश्ता

इसी बीच, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक ने अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में प्रमुख सदस्य प्रतिदिन 2 लाख 6 हजार बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेंगे।

क्या आप WhatsApp पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?

WhatsApp पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।

Follow News Tv India on WhatsApp

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के हमले एक बड़ा भू-राजनीतिक झटका हैं, जिससे वैश्विक तेल जोखिम प्रीमियम बढ़ा है और सोना-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश साधनों की मांग भी बढ़ी है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में मानदंड, मॉडल विकास और अनुसंधान प्रमुख राजीव शरण ने कहा, "भारत लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से ईंधन महंगा होगा, महंगाई बढ़ेगी और चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक की मुद्रास्फीति नियंत्रण की नीति प्रभावित हो सकती है और ब्याज दरों में कटौती टल सकती है।"

Advertisement
Advertisement

भारतीय शेयर बाजार पहले ही जोखिम से बचाव की स्थिति में आ चुके हैं। अधिक उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की निकासी और वाहन, वित्त तथा ऊर्जा-आधारित क्षेत्रों पर दबाव की आशंका जताई जा रही है।

जब तक तनाव बढ़ने का खतरा बना रहेगा, कीमती धातुओं को समर्थन मिलने की संभावना बनी रहेगी।

शरण ने कहा कि संघर्ष से जुड़ा अतिरिक्त मूल्य तब ही कम होगा जब तेहरान में नेतृत्व को लेकर स्पष्टता आएगी, तनाव कम करने के ठोस प्रयास होंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग खुले रहने का भरोसा मिलेगा।

रिपोर्टों के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है। व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में यह 100 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक हो सकता है।

जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की वृद्धि से भारत का वार्षिक आयात बिल लगभग 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है, जिससे व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ता है।

दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है और भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से होता है। निकट भविष्य में बाजार का रुख कंपनियों की आय के बजाय तेल की कीमतों पर अधिक निर्भर रह सकता है।

लंबे समय तक तनाव बने रहने से परिवहन और समुद्री बीमा लागत बढ़ सकती है, खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्ग बाधित हो सकते हैं और व्यापार संतुलन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

News Tv India हिंदी Official | Verified Expert • 27 Mar, 2026 Editor

News Tv India डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

LIVE TV

हमें फॉलो करें

Advertisement
Advertisement
Logo

Never miss what matters

Enable notifications to get exclusive updates and top news stories.

⚙️ Manage Notifications

You are currently receiving our latest breaking news and updates.

Manage Notifications