राजस्थान: सांसद हनुमान बेनीवाल को हाईकोर्ट से राहत, फिलहाल नहीं खाली करना होगा सरकारी फ्लैट
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और सांसद हनुमान बेनीवाल को राहत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने उनके सरकारी आवास को खाली कराने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार के आदेश पर अंतरिम स्टे लगाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
जयपुर : राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और सांसद हनुमान बेनीवाल को राहत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने उनके सरकारी आवास को खाली कराने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार के आदेश पर अंतरिम स्टे लगाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
सरकार के आदेश पर लगी रोक
राजस्थान सरकार ने हनुमान बेनीवाल से फ्लैट खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की थी। इस आदेश के खिलाफ बेनीवाल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल उन्हें अपना सरकारी आवास खाली नहीं करना होगा। साथ ही, सरकार को दो सप्ताह में यह जानकारी देने के निर्देश दिए गए कि कितने ऐसे सांसद और विधायक हैं जो पद पर न रहते हुए भी सरकारी आवास का उपयोग कर रहे हैं।
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बेनीवाल का पक्ष
बेनीवाल की ओर से अधिवक्ता सुमित्रा चौधरी और प्रेमचंद शर्मा ने दलील दी कि उन्हें आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था, लेकिन प्रक्रिया में कानून का पालन नहीं हुआ। नोटिस 1 जुलाई तक का दिया गया, जबकि सुनवाई 11 जुलाई को हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि संपदा अधिकारी द्वारा अनावश्यक दबाव बनाया गया और जल्दबाजी में कार्रवाई की जा रही है, जो अनुचित है। कोर्ट ने इन दलीलों पर गौर करते हुए उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की।
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Follow News Tv India on WhatsAppदो वर्ष पहले मिला था आवास
करीब दो साल पहले हनुमान बेनीवाल को बतौर विधायक फ्लैट A-3/703 आवंटित किया गया था। इसके बाद सांसद बनने पर सरकार ने उन्हें यह आवास खाली करने का आदेश दिया। बेनीवाल ने अदालत में यह भी मुद्दा उठाया कि अन्य पूर्व विधायक और सांसद भी सरकारी आवास का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल उन्हीं पर की जा रही है।
पारदर्शिता पर सवाल
हाईकोर्ट का यह आदेश न सिर्फ बेनीवाल को तत्काल राहत देता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि सरकारी प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता क्यों नहीं है। अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में सरकार को निष्पक्षता बरतनी होगी और सभी पर समान नियम लागू करने होंगे।
हनुमान बेनीवाल के लिए यह राहत अस्थायी है, क्योंकि अदालत ने सरकार से जवाब मांगते हुए दो सप्ताह की समयसीमा तय की है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और अदालत की अगली सुनवाई में क्या फैसला आता है। फिलहाल, इस आदेश से बेनीवाल को अपने सरकारी आवास में बने रहने की इजाजत मिल गई है।