जासूसी का खेल! ISI के लिए राज उगलता पकड़ा गया भारत का कर्मचारी, पूछताछ में बड़े खुलासे की आशंका
राजस्थान के जैसलमेर से पकड़ा गया ISI का खुफिया मोहरा — सरकारी नौकरी की आड़ में भारत की गोपनीय जानकारियां लीक कर रहा था शकूर खान! बताया जा रहा है कि ये ‘सरकारी जासूस’ बिना अनुमति पाकिस्तान की कई यात्राएं कर चुका था और ISI एजेंट्स से सीधे संपर्क में था।
जयपुर : राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रोजगार विभाग में कार्यरत सरकारी कर्मचारी शकूर खान को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
सरकारी पद का दुरुपयोग कर भेजी संवेदनशील जानकारी
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, शकूर खान ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों और गोपनीय जानकारियों तक पहुंच बनाई। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि वह यह जानकारी विभिन्न माध्यमों से ISI एजेंटों तक वर्षों से पहुंचा रहा था। उसके मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया गतिविधियों की बारीकी से जांच की जा रही है।
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Follow News Tv India on WhatsApp बिना अनुमति पाकिस्तान यात्राएं बनीं संदेह की वजह
जांच में यह भी सामने आया है कि शकूर खान ने बिना विभागीय अनुमति के कम से कम 6 से 7 बार पाकिस्तान यात्रा की थी। इन यात्राओं के दौरान उसने कथित तौर पर ISI एजेंटों से मुलाकात कर गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान किया। इन्हीं अवैध यात्राओं के चलते उस पर संदेह गहराया और सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी निगरानी शुरू की।
जयपुर में पूछताछ, नेटवर्क के विस्तार की जांच
गिरफ्तारी के बाद शकूर खान को जैसलमेर से जयपुर ले जाया गया है, जहां विशेष जांच दल (एसआईटी) उससे गहन पूछताछ कर रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या वह अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा है। इसके साथ ही शक है कि इसमें और भी सरकारी कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।
सीमा सुरक्षा और सरकारी निगरानी पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की निगरानी प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले से भारत में सक्रिय ISI नेटवर्क की गहराई का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह घटना सरकार को कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच और साइबर सुरक्षा को सख्त करने की दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती है।
जैसलमेर जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में इस प्रकार की जासूसी गतिविधि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्र की सुरक्षा नीति पर पुनर्विचार का स्पष्ट संकेत है। सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचे और इससे जुड़े हर व्यक्ति को न्याय के कठघरे में लाए।