'2018 से पहले शिक्षा क्षेत्र में नहीं हुआ कोई विकास', मुख्यमंत्री माणिक साहा का विपक्ष पर हमला; 20 करोड़ के नए स्कूल भवनों की सौगात
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने त्रिपुरा में 20.64 करोड़ रुपये की लागत से बने 4 स्कूलों का उद्घाटन किया। उन्होंने पिछली सरकार पर 10,323 शिक्षकों के मामले और आर्थिक तंगी जैसे 'अनसुलझे मुद्दे' छोड़ने का आरोप लगाया और आदिवासी कल्याण की प्रतिबद्धता दोहराई।
अगरतला : त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पाठ्यपुस्तकों से परे समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2018 से पहले शिक्षा क्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण विकास नहीं हुआ था।
मुख्यमंत्री ने चार उच्च माध्यमिक विद्यालयों के नवनिर्मित भवनों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष उद्घाटन करते हुए कहा कि 2018 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले शिक्षा क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि शनिवार को उद्घाटन किए गए चार उच्च माध्यमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे के विकास पर लगभग 20.64 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
सभा को संबोधित करते हुए साहा ने वाम मोर्चा सरकार का नाम लिए बिना कहा कि पिछली सरकार भारी वित्तीय बोझ और कई अनसुलझे मुद्दे छोड़ गई थी, जिनमें 10,323 शिक्षकों का मामला भी शामिल है। उन्होंने कहा कि 2018 से पहले शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में कोई उल्लेखनीय विकास नहीं देखा गया। इसी वजह से अब हमें और अधिक मेहनत करनी पड़ रही है। आर्थिक तंगी के साथ-साथ कई मामले भी पीछे छूट गए। इन चुनौतियों के बावजूद, हमारी सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समावेशी विकास पर जोर देते हुए प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रभारी साहा ने कहा कि आदिवासी समुदायों के कल्याण को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 700 आदिवासी समूह हैं, जिनमें से 19 त्रिपुरा में हैं। सभी वर्गों, जातियों, जनजातियों, मणिपुरियों, और अल्पसंख्यकों के बीच एकता ही हमारी ताकत है। हमें मिलकर एक नए त्रिपुरा का निर्माण करना होगा।
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Follow News Tv India on WhatsAppमुख्यमंत्री ने बताया कि 2019 से 2024 के बीच त्रिपुरा के सात प्रमुख आदिवासी व्यक्तियों को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समुदाय की महिला द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति नियुक्त करना आदिवासी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पहले आदिवासी समुदायों को बांटने और भ्रमित करने के प्रयास किए गए, लेकिन हमारा लक्ष्य सद्भाव और सामूहिक प्रगति सुनिश्चित करना है।