नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव की मेजबानी की। इस उच्च स्तरीय बैठक में न केवल द्विपक्षीय व्यापार बल्कि जटिल वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी गहन मंथन हुआ।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा और उर्वरक जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ भविष्य की तकनीक, नवाचार और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) में सहयोग के नए रास्तों पर चर्चा की। कनेक्टिविटी और मोबिलिटी को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, जो भविष्य में आर्थिक गलियारों को मजबूत करेगी।

पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक स्थिरता पर चर्चा

इस मुलाकात की सबसे बड़ी बात क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर हुआ विचार-विमर्श रहा। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके वैश्विक प्रभाव को लेकर दोनों देशों ने अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि चर्चा में प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे आधुनिक विषयों को प्राथमिकता दी गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और भारत के बीच यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह रूस के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और अधिक विविधता देना चाहता है।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा

विदेश मंत्री से मुलाकात से पूर्व डेनिस मंटुरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी भेंट की। इस बैठक में दिसंबर 2025 में हुए 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा को याद करते हुए समझौतों को धरातल पर उतारने के प्रयासों का स्वागत किया।

रूसी उप प्रधानमंत्री ने आर्थिक साझेदारी, निवेश और औद्योगिक सहयोग में हुई प्रगति का विवरण साझा किया। दोनों देशों का लक्ष्य अब व्यापारिक संतुलन को बेहतर बनाना और कनेक्टिविटी परियोजनाओं, जैसे कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) में तेजी लाना है।

भविष्य के रोडमैप पर केंद्रित वार्ता

बैठक में उर्वरक आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया, जो भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही, दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा देने के लिए नए मोबिलिटी समझौतों पर बात हुई।

यह दौरा भारत-रूस के ऐतिहासिक संबंधों को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप ढालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। रणनीतिक स्वायत्तता और आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों ने आने वाले महीनों में उच्च स्तरीय संवाद को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।