नई दिल्ली: भारतीय मुद्रा बाजार में आज एक युगांतरकारी बदलाव देखा गया। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए ने पिछले 13 वर्षों की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त हासिल की है। गुरुवार को कारोबारी सत्र की समाप्ति पर रुपया 93.10 के स्तर पर बंद हुआ, जिसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।

लंबी छुट्टियों के बाद जब बाजार खुला, तो भारतीय मुद्रा में जबरदस्त मजबूती देखी गई। दिन के कारोबार के दौरान रुपया एक समय पर 1.7 प्रतिशत तक उछलकर 93.25 के स्तर को भी पार कर गया था। यह प्रदर्शन सितंबर 2013 के बाद से अब तक का सबसे शानदार सुधार माना जा रहा है।

आरबीआई की सख्ती और सट्टेबाजी पर लगाम

रुपए की इस रिकॉर्ड तोड़ वापसी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की कठोर नीतियां प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। केंद्रीय बैंक ने हाल ही में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुद्रा की अस्थिरता को रोकने के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया है।

विशेष रूप से, आरबीआई ने बैंकों को निवासी और अनिवासी दोनों प्रकार के ग्राहकों के लिए रुपए के 'नॉन-डिलीवरी फॉरवर्ड' (NDF) जारी करने से रोक दिया है। इसके अलावा, कंपनियों को अब उन फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को फिर से बुक करने की अनुमति नहीं होगी जिन्हें एक बार रद्द किया जा चुका है। इन कदमों का सीधा असर सट्टेबाजी की गतिविधियों पर पड़ा है।

वैश्विक कूटनीति और बाजार की धारणा में बदलाव

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि केवल घरेलू नीतियां ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों ने भी रुपए को संजीवनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया संबोधन ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता (Risk Sentiment) को बढ़ाया है। उनके भाषण में तनाव के बजाय बातचीत और कूटनीतिक समाधान के संकेत मिले, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा लौटा।

हालांकि, बाजार में अभी भी अनिश्चितता के बादल पूरी तरह छंटे नहीं हैं। जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग जैसे प्रमुख एशियाई सूचकांकों में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारतीय रुपए का अपनी मजबूती बनाए रखना देश की आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार और कच्चे तेल की चुनौती

भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, जो वर्तमान में 700 अरब डॉलर के पार है, मुद्रा बाजार के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है। यह विशाल भंडार केंद्रीय बैंक को किसी भी आकस्मिक गिरावट की स्थिति में बाजार में हस्तक्षेप करने की पर्याप्त शक्ति देता है।

दूसरी ओर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड वायदा में 5.24 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है और यह 106.47 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। आमतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल रुपए पर दबाव डालता है, लेकिन वर्तमान में आरबीआई के सक्रिय हस्तक्षेप ने इस प्रभाव को सीमित कर दिया है।

मुद्रा बाजार अब शुक्रवार को गुड फ्राइडे के अवसर पर बंद रहेगा। कारोबारी अब अगले सप्ताह की शुरुआत पर नजरें टिकाए हुए हैं कि क्या रुपया अपनी इस ऐतिहासिक बढ़त को बरकरार रख पाएगा।