बजट सत्र 2026: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विपक्ष के हंगामे से नाराज भाजपा, नड्डा बोले— "संसदीय मर्यादा को तार-तार किया"
संसद के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के दौरान विपक्ष द्वारा किए गए व्यवहार को भारतीय जनता पार्टी ने 'अत्यंत निराशाजनक' और 'लोकतंत्र का अपमान' बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस सहित 'इंडी गठबंधन' (I.N.D.I.A) पर देश की सांस्कृतिक विरासत के अपमान का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर विपक्ष के व्यवहार को गलत और निराशाजनक बताया है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बजट सत्र की शुरुआत के समय राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष का व्यवहार बेहद गलत और निराशाजनक रहा। ऐसे मौके पर शांति, सम्मान और गंभीरता जरूरी होती है, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने संसद की मर्यादा का ध्यान नहीं रखा। समझ से परे है कि राष्ट्र से जुड़े भावनात्मक शब्दों, बंगाल की गौरवशाली परंपरा और वंदे मातरम् जैसे विचारों से इन दलों को आपत्ति क्यों है। हैरानी की बात यह रही कि तृणमूल कांग्रेस भी इस पूरे हंगामे का हिस्सा बनी रही।
नितिन नवीन ने आगे लिखा कि संसद देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था है। वहां किया गया ऐसा व्यवहार न केवल गलत है, बल्कि जनता की भावनाओं को भी आहत करता है। इस तरह की हरकतों के लिए विपक्ष को देश और संसद से माफी मांगनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए एक्स पोस्ट में लिखा कि संसद में बजट सत्र के आरंभ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के दौरान जिस तरह से कांग्रेस पार्टी के नेताओं और विपक्ष ने आदतन संसदीय मर्यादा को तार-तार किया, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है। मुझे समझ में नहीं आता कि वंदे मातरम्, बंकिम बाबू और पश्चिम बंगाल की धरती से कांग्रेस और इंडी गठबंधन को इतनी नफरत क्यों है।
क्या आप WhatsApp पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
WhatsApp पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।
Follow News Tv India on WhatsAppजेपी नड्डा ने आगे लिखा कि आश्चर्य की बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस भी विपक्षी हंगामे में साझेदार बन रही थी। इन लोगों ने संसद की गरिमा को जिस तरह ठेस पहुंचाया है। वह अति निंदनीय है। इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए वो कम है। इन लोगों को संसद और देश से माफी मांगनी चाहिए।