क्या आप भी है सांस फूलने की समस्या से परेशान तो न ले इसे हल्के में जानें कारण और उपाय
सांस फूलना एक नॉर्मल लेकिन गंभीर प्रॉब्लम है जो किसी भी एज के पर्सन को हो सकती है। कई बार लोग इस पर ध्यान नहीं देते है लेकिन यह अक्सर किसी बड़ी बीमारी का संकेत होता है। अगर थोड़ा सा काम करने के बाद आपकी सांस फूल रही है तो आपके इसे बिलकुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए इस के कारण और ट्रीटमेंट के बारे में आपको डिटेल्स में बताते है।
ऑक्सीजन की सप्लाई में दिक्कत
सांस फूलना मतलब वह कंडीशन है जब आप नॉर्मल से ज्यादा हांफते हैं या सांस लेने में जकड़न फील करते हैं। यह कोई अलग बीमारी नहीं बल्कि शरीर का एक संकेत है कि ऑक्सीजन की सप्लाई सही से नहीं हो रही है। कई बार सीढ़ियां चढ़ने पर भी थकान होने लगती है।
सांस फूलने के सिंप्टम्स
इस के सिंप्टम्स अगर आप थोड़ा सा ध्यान दे तो भी पता चल सकते है। इस के सिंप्टम्स में छाती में जकड़न, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज, होंठ या नाखून नीले पड़ना, चक्कर आना और पसीना आना शामिल है।
• कई बार कुछ लोगों को रात में सोते समय सांस फूलती है जिससे नींद नहीं आती है अगर ये सिंप्टम्स 5 या 10 मिनट से ज्यादा रहें या बार-बार हों तो आपको बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।
सांस फूलने के कारण
सांस फूलने के सबसे नॉर्मल कारण हैं अस्थमा, सीओपीडी या दिल की कमजोरी होना। कई बार वायरल इंफेक्शन या निमोनिया भी अचानक सांस फूलने का कारण बनते हैं।
• कभी-कभी यह सिर्फ तनाव या मोटापा की वजह से होता है। इस से शरीर में खून की कमी या फेफड़ों में पानी भरने से भी यह प्रॉब्लम शुरू होती है।
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हार्ट से जुड़ी प्रॉब्लम्स
इस से हार्ट की बीमारियां जैसे हार्ट फेलियर या हार्ट अटैक में सांस फूलना पहला सिम्पटम जाता है। अगर हार्ट ठीक से खून पंप नहीं कर पाता तो फेफड़ों में प्रेशर बढ़ता है।
• ऐसे में आराम में भी सांस फूलती है और पैरों में सूजन भी आ सकती है। अगर आपको पहले कभी हार्ट की प्रॉब्लम रही हो तो यह सिंप्टम्स कभी इग्नोर नहीं करने चाहिए।
फेफड़ों की प्रॉब्लम्स
फेफड़ों की बीमारियां जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या फाइब्रोसिस में सांस लेने की नलियां संकरी हो जाती हैं। यह धूल, धुआं या मौसमी एलर्जी से बहुत ज्यादा ट्रिगर होता है।
• वहीं लंबे समय तक सिगरेट पीने वालों में सीओपीडी नॉर्मल है जिसमें सांस फूलना रोज की प्रॉब्लम बन जाती है।
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सांस फूलने का ट्रीटमेंट
अस्थमा में इनहेलर को ज्यादातर सजेस्ट किया जात है।ऑक्सीजन थेरेपी, फिजियोथेरेपी और लाइफस्टाइल में चेंजेज करने से यह प्रॉब्लम काफी हद तक दूर हो जाती है।
• इस के अलावा वजन कम करना भी जरूरी है। कई बार गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।
अपनाएं बचाव के आसान उपाय
हेल्दी रहने के लिए डेली व्यायाम करें, सिगरेट और पॉल्यूशन से दूर रहें अपने वजन को कंट्रोल में रखें और तनाव कम करें।
• अगर हो सके तो न्यूट्रिएंट्स से भरा खाना खाएं जिसमें हरी सब्जियां, फल और पानी ज्यादा हो। अगर कोई पुरानी बीमारी है तो डेली दवा लें।
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