वॉशिंगटन: खाड़ी क्षेत्र में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि तेल व्यापार से बड़ा लाभ कमाने के लिए होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) को फिर से पूरी तरह सक्रिय किया जा सकता है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि समुद्री यातायात में सुधार के शुरुआती संकेत मिलने लगे हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "थोड़ा और समय मिलने पर हम आसानी से होर्मुज जलसंधि खोल सकते हैं, तेल निकाल सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। यह दुनिया के लिए एक 'गशर' (बड़ा स्रोत) साबित होगा।" उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है जब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही में बेहद धीमी लेकिन सतर्क वापसी देखी जा रही है।
जहाजों की आवाजाही में सुधार के संकेत
मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म 'विंडवर्ड' के आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल को इस जलसंधि से 16 जहाज गुजरे। यह लगातार तीसरा दिन था जब आवाजाही दर्ज की गई, जो पिछले दिनों हुए गंभीर व्यवधान के बाद एक सकारात्मक बदलाव है। बुधवार को भी 16 मालवाहक जहाज यहां से निकले थे, जबकि इससे एक दिन पहले यह संख्या मात्र 11 थी।
हालांकि, यह सुधार अभी भी संघर्ष पूर्व के स्तर से काफी नीचे है। यह संकट मार्च के मध्य में तब गहराया था जब ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की निगरानी में एक अनिवार्य नेविगेशन कॉरिडोर लागू कर दिया था। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े थे और ईरानी निगरानी में संचालन करने की मजबूरी पैदा हो गई थी।
पश्चिमी देशों के जहाजों की 'टेस्टिंग'
हालिया गतिविधियों से पता चलता है कि कुछ शिपिंग ऑपरेटर्स अब इन प्रतिबंधों को परखने लगे हैं। दो अप्रैल तक अरब की खाड़ी में लगभग 656 जहाज मौजूद थे, जिनमें से 55 प्रतिशत मालवाहक और 45 प्रतिशत तेल टैंकर थे। दिलचस्प बात यह है कि ओमान के नियंत्रण वाले तीन जहाज ईरानी कॉरिडोर को दरकिनार कर अंतरराष्ट्रीय मार्गों से बाहर निकले।
इनमें से एक एलएनजी (LNG) टैंकर सोहार मस्कट के पास पहुंचा, जो तनाव बढ़ने के बाद इस मार्ग से गुजरने वाला पहला एलएनजी जहाज बना है। इसके साथ ही फ्रांसीसी लॉजिस्टिक्स कंपनी 'सीएमए सीजीएम' से जुड़ा एक कंटेनर जहाज भी इस जलसंधि को पार करने में सफल रहा, जो पश्चिमी देशों से जुड़े जहाजों के लिए एक शुरुआती उदाहरण पेश करता है।
स्वामित्व का उलझा हुआ जाल और सुरक्षा चिंताएं
होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और नियंत्रण अब भी एक जटिल चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पनामा के झंडे वाले 142 जहाज इस क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रिय हैं, जिसके बाद लाइबेरिया और मार्शल आइलैंड्स का नंबर आता है। जहाजों के वास्तविक मालिकों का संबंध मुख्य रूप से चीन, भारत, तुर्की और ईरान से है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि लगभग 25 प्रतिशत जहाजों का स्वामित्व अभी भी अज्ञात है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान के बाद अब वैश्विक बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका इस रणनीतिक मार्ग को सुरक्षित और लाभदायक बनाने के लिए आने वाले दिनों में क्या ठोस कदम उठाता है।