नई दिल्ली: मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अजरबैजान के साथ अपने रिश्तों को 'सभ्यतागत जड़ों' से जुड़ा बताया है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ हुई हालिया बातचीत में अजरबैजान की सरकार और वहां की जनता द्वारा दिखाए गए समर्थन की जमकर सराहना की।
पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए अपने संदेश में स्पष्ट किया कि मित्र और भाईचारे वाले राष्ट्र कठिन समय में ही एक-दूसरे की असली पहचान करते हैं। उन्होंने अजरबैजान को एक ऐसा पड़ोसी बताया जिसके साथ ईरान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हैं।
अजरबैजान के नेतृत्व के प्रति व्यक्त किया आभार
ईरानी राष्ट्रपति ने न केवल वर्तमान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव बल्कि पूर्व नेतृत्व के साथ हुए संवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संबंधों की जड़ें जितनी गहरी होती हैं, भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए यह बंधन उतना ही मजबूत होता जाता है। अजरबैजान की ओर से संकट के समय दिखाई गई सहानुभूति को ईरान ने एक बड़े सकारात्मक संकेत के रूप में स्वीकार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेजेशकियन का यह बयान क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता और पड़ोसी देशों के साथ विवादों को कम करने की उनकी विदेश नीति का हिस्सा है। ईरान अब अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ आर्थिक और रणनीतिक तालमेल बिठाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।
"ईरानी जनता अमेरिकी लोगों के दुश्मन नहीं"
अजरबैजान के साथ रिश्तों पर चर्चा करने के साथ-साथ राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की छवि को लेकर भी एक बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि ईरानी जनता अमेरिकी या यूरोपीय लोगों के प्रति कोई मनमुटाव या दुश्मनी नहीं रखती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने हमेशा विदेशी सरकारों की नीतियों और वहां की आम जनता के बीच एक स्पष्ट अंतर रखा है।
हालांकि, उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ इजरायल के एक 'प्रॉक्सी' (प्रतिनिधि) के रूप में काम कर रहा है। पेजेशकियन के अनुसार, ईरान ने अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी विस्तारवाद या उपनिवेशवाद का रास्ता नहीं चुना, बल्कि वह खुद वैश्विक शक्तियों के दबाव और आक्रमण का शिकार रहा है।
शांति और संप्रभुता पर केंद्रित नीति
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान की प्राथमिकता अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है, न कि किसी पर प्रभुत्व जमाना। उन्होंने पड़ोसी देशों, अमेरिका और यूरोप के संदर्भ में कहा कि ईरान सभी के साथ गरिमापूर्ण संबंधों का इच्छुक है, बशर्ते विदेशी हस्तक्षेप बंद हो।
क्षेत्रीय कूटनीति में आ रहे इन बदलावों को वैश्विक राजनीति के जानकार काफी अहम मान रहे हैं। अजरबैजान के साथ प्रगाढ़ होते रिश्ते और पश्चिमी देशों की जनता के प्रति नरम रुख, पेजेशकियन सरकार की एक नई और संतुलित कूटनीतिक पहुंच की ओर इशारा करते हैं।