काठमांडू/नई दिल्ली : नेपाल की राजनीति में युवाओं की आवाज बनकर उभरे प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्ता संभालते ही एक ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय पर मुहर लगा दी है। सितंबर 2025 के भ्रष्टाचार विरोधी 'Gen-Z आंदोलन' के दौरान पुलिस कार्रवाई में जान गंवाने वाले 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का वादा अब हकीकत में बदल रहा है।

कैबिनेट का पहला बड़ा फैसला: युवाओं को सम्मान

प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में बालेन शाह ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी थी। नेपाल सरकार का यह कदम न केवल पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा, बल्कि देश के युवाओं के बीच सरकार की विश्वसनीयता को भी मजबूत करेगा।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) ने जारी किया नोटिस

इस सरकारी आदेश को अमली जामा पहनाने की शुरुआत नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने कर दी है:

  • सूची का प्रकाशन: प्राधिकरण ने उन 27 छात्रों के परिजनों की आधिकारिक सूची जारी की है जिन्हें नियुक्त किया जाना है।

  • योग्यता आधारित नियुक्ति: परिजनों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार उनके गृह जिले के निकटतम कार्यालयों में पदस्थापित किया जाएगा।

  • समय सीमा: नोटिस के अनुसार, संबंधित परिवारों को 35 दिनों के भीतर अपने रिश्ते का प्रमाण पत्र और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे, जिसके तुरंत बाद नियुक्ति पत्र सौंप दिए जाएंगे।

फ्लैशबैक: क्या था सितंबर 2025 का Gen-Z आंदोलन?

नेपाल के इतिहास में 8 सितंबर 2025 की तारीख काले अक्षरों में दर्ज है:

  1. भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग: युवाओं (Generation Z) ने तत्कालीन सरकार के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू किया था।

  2. पुलिस फायरिंग: आंदोलन के पहले दिन पुलिस की गोलीबारी में 19 छात्रों की मौत हो गई थी।

  3. त्रासदी: अगले दिन अस्पताल में दम तोड़ने वाले 8 अन्य छात्रों के साथ यह संख्या 27 पहुँच गई।

    इस सामूहिक शहादत ने पूरे नेपाल को झकझोर दिया और अंततः सत्ता परिवर्तन की नींव रखी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और जवाबदेही की मांग

जहाँ एक ओर सरकार के इस त्वरित कदम की सराहना हो रही है, वहीं विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने कुछ और मांगें भी रखी हैं:

  • दोषियों पर कार्रवाई: विपक्षी दलों का कहना है कि सिर्फ नौकरी देना काफी नहीं है; उन पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं की पहचान कर सजा दी जानी चाहिए जो इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार थे।

  • आर्थिक सहायता: कुछ संगठनों ने नौकरी के साथ-साथ एकमुश्त विशेष मुआवजा राशि देने की भी मांग की है।