नई दिल्ली : केंद्र में एनडीए सरकार को 11 साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक विशेष संदेश के जरिए देश के किसानों के योगदान को नमन करते हुए सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं का ब्योरा साझा किया। उन्होंने लिखा, "पहले जहां किसानों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उधार लेना पड़ता था, वहीं बीते 11 सालों में हमारी सरकार के फैसलों से उनका जीवन आसान बना है।"
पीएम किसान सम्मान निधि से सीधे लाभ
प्रधानमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के तहत अब तक करोड़ों किसानों को सालाना ₹6,000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके खातों में दी गई है। यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित हुई है।
एमएसपी में बढ़ोतरी से मिली स्थिर आय
पीएम मोदी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में हुई वृद्धि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा खरीफ और रबी फसलों के एमएसपी में समय-समय पर की गई बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम मिला है और उनकी आमदनी में सीधा असर दिखा है। यह किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम है।
मृदा स्वास्थ्य और सिंचाई पर फोकस
प्रधानमंत्री ने बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और सिंचाई से जुड़ी विभिन्न योजनाओं ने खेतों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद की है। इससे खेती अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनी है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिला है।
एफपीओ और डिजिटल मंडियों से कृषि में नई क्रांति
सरकार ने बताया कि देशभर में 10,000 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPOs) बनाए गए हैं। इन संगठनों ने सामूहिक सौदेबाजी की ताकत देकर किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य दिलाने का काम किया है। वहीं, ई-नाम प्लेटफॉर्म के जरिए 1,500 से ज्यादा मंडियों को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है, जिससे कृषि बाजार पारदर्शी और अधिक किसान-केंद्रित बने हैं।
कृषि अवसंरचना से फसल कटाई के बाद भी कमाई
पीएम मोदी ने कृषि अवसंरचना फंड का ज़िक्र करते हुए बताया कि 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस फंड ने ग्रामीण लॉजिस्टिक्स, कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक गोदामों को बढ़ावा दिया है। इसका परिणाम यह हुआ कि किसानों की आमदनी अब फसल कटाई के बाद भी जारी रहती है।
एनडीए सरकार के 11 सालों में किसान-कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। पीएम मोदी ने वादा किया कि किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएं आगे भी "और जोश के साथ" चलाई जाएंगी। कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह 11 साल का सफर ऐतिहासिक माना जा रहा है।